नमस्कार, सत्य के साधकों! आज के इस कलियुग में, जहां भ्रम और अंधविश्वास का जाल फैला हुआ है, संत रामपाल जी महाराज जी का अमृत तत्वज्ञान हमें सच्चे प्रकाश की ओर ले जाता है। संत रामपाल जी महाराज जी, जो स्वयं जगतगुरु तत्वदर्शी संत हैं, पवित्र शास्त्रों की गहन व्याख्या के माध्यम से स्पष्ट करते हैं कि कबीर साहेब जी ही साकार पूर्ण परमात्मा कविर्देव हैं। वे सतलोक से सशरीर अवतरित होकर सृष्टि की रचना, पालन और संहार करते हैं, तथा तत्वज्ञान का प्रचार कर भक्तों को अमर पद प्रदान करते हैं। यह विस्तृत ब्लॉग संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान पर आधारित है, जहां वेद, गीता, कुरान, बाइबल, गुरु ग्रंथ साहेब, कबीर सागर और कबीर वाणी जैसे शास्त्रों से अनेक प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं। प्रत्येक प्रमाण को उद्धरण (क्वोट) रूप में डिजाइन किया गया है, साथ ही उनकी जीवनी, प्रमुख लीलाओं और भावार्थ का विस्तार से वर्णन भी जोड़ा गया है। आइए, इन प्रमाणों से कबीर साहेब जी की दिव्यता को गहराई से समझें और सतभक्ति की ओर अग्रसर हों।
संत रामपाल जी महाराज जी का संदेश: “पवित्र शास्त्रों में स्पष्ट है कि कबीर साहेब जी ही पूर्ण परमात्मा हैं। वे चारों युगों में अवतरित होते हैं – सतयुग में सत सुकृत, त्रेता में मुनींद्र, द्वापर में करुणामय, और कलियुग में कबीर नाम से। कलियुग में वे तत्वदर्शी संत के रूप में आकर शास्त्रों की व्याख्या करते हैं, जो मैं (संत रामपाल जी महाराज) कर रहा हूं। सतनाम और सारनाम की भक्ति से ही सतलोक प्राप्ति संभव है।”
कबीर साहेब जी की जीवनी: सतलोक से अवतरण का रहस्य
संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, कबीर साहेब जी का अवतरण 1398 ई. (विक्रमी संवत 1455) में ज्येष्ठ पूर्णिमा को ब्रह्म मुहूर्त में काशी (वाराणसी) के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर शिशु रूप में हुआ। वे सतलोक (ऋतधाम) से सशरीर अवतरित हुए, माता के गर्भ से जन्म नहीं लिया। लहरतारा तालाब गंगा जल से भरा था, और इस घटना के प्रत्यक्ष दृष्टा स्वामी रामानंद जी के शिष्य ऋषि अष्टानंद जी थे, जिन्होंने आकाश से तीव्र प्रकाश उतरते देखा। नीरू और नीमा नामक निसंतान दंपत्ति (मूल ब्राह्मण गौरीशंकर और सरस्वती, लेकिन जबरन मुसलमान बनाए गए) ने उन्हें तालाब से उठाकर गोद लिया। वे जुलाहे का कार्य करते थे और शिव भक्त थे। कबीर साहेब जी ने उन्हें अपना माता-पिता चुना।
वे 120 वर्ष तक पृथ्वी पर रहे, तत्वज्ञान का प्रचार किया, और मगहर से सशरीर सतलोक लौट गए। काशी में जुलाहे की भूमिका निभाते हुए “कबीर दास” नाम से प्रसिद्ध हुए, लेकिन वे सर्व सृष्टि के रचयिता हैं। उनका मूल निवास सतलोक है, जहां वे सतपुरुष के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने अनामी लोक, अगम लोक, अलख लोक और सतलोक की रचना की।
कबीर वाणी (अमृतवाणी शब्द – अविगत से चल आए) “अविगत से चल आए, कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया। (टेक) न मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक हो दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा, वहाँ जुलाहे ने पाया।। मात-पिता मेरे कुछ नाहीं, ना मेरे घर दासी। जुलहा का सुत आन कहाया, जगत करें मेरी हाँसी।। पाँच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानुं ज्ञान अपारा। सत्य स्वरूपी नाम साहेब का सोई नाम हमारा।। अधर द्वीप गगन गुफा में तहां निज वस्तु सारा। ज्योत स्वरूपी अलख निरंजन भी धरता ध्यान हमारा।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): कबीर साहेब जी स्वयंभू हैं, सत्यलोक से आते हैं। न तो उनका पांच तत्व का शरीर है, न जन्म-मृत्यु। वे काशी के लहरतारा तालाब में कमल पर बालक रूप में प्रकट हुए। ब्रह्म (ज्योति निरंजन) भी उनकी पूजा करता है। यह उनकी स्वयंभू अवतरण लीला को सिद्ध करता है।
1. कबीर साहेब जी की प्रमुख लीलाएं: चमत्कारों का अकाट्य प्रमाण
संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, कबीर साहेब जी की 52 लीलाएं (कबीर सागर में वर्णित) उनके परमात्मा स्वरूप को प्रमाणित करती हैं। ये लीलाएं वेदों, कबीर सागर और वाणी से सिद्ध हैं।
- अवतरण और प्राकट्य की लीला: लहरतारा तालाब में कमल पर शिशु रूप। ऋषि अष्टानंद ने प्रकाश देखा। काशीवासी आश्चर्यचकित: “यह ब्रह्मा-विष्णु-महेश में से किसी का अवतार है, लेकिन अन्य परम शक्ति है।”
- लालन-पालन की लीला: 25 दिनों तक ग्रहण न किया। शिवजी साधु वेश में आए। कबीर साहेब ने कुंवारी गाय से दूध पिलाया।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 “अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।9।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): अमर पुरुष (कबीर साहेब) बालक रूप में प्रकट होने पर कुंवारी गायें स्वयं दूध देती हैं। यह लालन-पालन की लीला को सिद्ध करता है।
- नामकरण और सुन्नत की लीला: काजी ने कुरान खोली, सभी अक्षर “कबीर” बने। सुन्नत में ढेरों लिंग दिखाए, काजी डर गए।
- गुरु प्राप्ति की लीला: 5 वर्ष की आयु में पंचगंगा घाट पर ढाई वर्ष के रूप में लेटे। रामानंद जी ने “राम राम” सुनकर कंठी माला पहनाई। रामानंद को सतलोक ले गए, काल ब्रह्म दिखाया, सतनाम से ब्रह्मरंध्र खोला। रामानंद: “हे परमेश्वर, आप पूर्ण परमात्मा हैं।”
- महापुरुषों से मिलन: धर्मदास, गरीबदास, नानक देव, दादू, मलूक दास को सतलोक ले गए।
गुरु ग्रंथ साहेब, राग सिरी महला 1, पृष्ठ 24 “फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस… खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): कबीर साहेब ठग (लीला करने वाले) और सृष्टि रचयिता हैं। नानक देव जी की वाणी से उनकी दिव्यता सिद्ध।
- चमत्कार लीलाएं: कमाल-कमाली के शव जीवित किए। 18 लाख लोगों का भंडारा सतलोक से लाकर किया। सिकंदर लोदी का जलन रोग ठीक किया।
- मगहर की लीला: 120 वर्ष बाद मगहर गए, भ्रांति तोड़ी। चादरें उठाईं तो फूल मिले। सशरीर सतलोक लौटे।
कबीर सागर (बोध सागर, जीव धर्म बोध अध्याय) “पूर्ण तत्वदर्शी संत की पहचान… चमत्कार जैसे कमाल-कमाली का शव जीवित करना, भंडारा।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): ये लीलाएं कबीर साहेब की सर्वशक्तिमानता सिद्ध करती हैं। वेदों में कहा: वे अमर हैं।
2. पवित्र वेदों से प्रमाण: कविर्देव का साक्ष्य
वेद सृष्टि के आदि ज्ञान हैं। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, ये कबीर साहेब के अवतरण, बालक रूप, चमत्कारों और तत्वज्ञान को सिद्ध करते हैं।
यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्र 25 “समिद्धोऽअद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान्यजसि जातवेदः। आ च वह मित्रामहश्चिकित्वान्त्वं दूतः कविरसि प्रचेताः।।25।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): जब भक्त मनमानी पूजा करते हैं, कविर्देव (कबीर) तत्वज्ञान प्रकट करते हैं। यह अवतरण और ज्ञान प्रचार को सिद्ध करता है।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 “शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन। कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्राम् अत्येति रेभन्।।17।।” भावार्थ: शिशु रूप में कविर्गीर्भि (कबीर वाणी) से निर्मल ज्ञान पुण्यात्माओं को कविताओं से बताते हैं।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 “ऋषिमना य ऋषिकृत् स्वर्षाः सहस्त्रणीथः पदवीः कवीनाम्। तृतीयम् धाम महिषः सिषा सन्त् सोमः विराजमानु राजति स्टुप्।।18।।” भावार्थ: विलक्षण बच्चे के रूप में कवि भूमिका, हजारों वाणियां रचते हैं। सत्यलोक पर तेजोमय शरीर में विराजमान।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मंत्र 19 “चमूषच्छ्येनः शकुनो विभृत्वा गोविन्दुर्द्रप्स आयुधानि बिभ्रत्। अपामूर्भि सचमानाः समुद्रं तुरीयं धाम महिषो विवक्ति।।19।।” भावार्थ: कामधेनु रूपी, तत्व ज्ञान से मोक्ष दाता। अनामी लोक में रहते हैं।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मंत्र 20 “मर्यो न शुभ्रस्तन्वं मृजानोऽत्यो न सृत्वा सनये धनानाम्। वृषेव यूथा परि कोशमर्षनकनिक्रदच्चम्बो३रा विवेश।।20।।” भावार्थ: अमर, श्वेत शरीर धारण कर पृथ्वी पर आते हैं। सत्यभक्ति कराते हैं।
अथर्ववेद कांड 4 अनुवाक 1 मंत्र 7 “योऽथर्वाणं पित्तरं देवबन्धुं बृहस्पतिं नमसाव च गच्छात्। त्वं विश्वेषां जनिता यथासः कविर्देवो न दभायत् स्वधावान्।।7।।” भावार्थ: जगत पिता, ज्ञान दाता, सतलोक ले जाने वाले कविर्देव (कबीर) हैं।
अन्य मंत्र: सामवेद संख्या 359 श्लोक 8, यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 26। ये माता गर्भ न लेना, कवि रूप सिद्ध करते हैं।
3. पवित्र गीता से प्रमाण: तत्वदर्शी संत के माध्यम से कविर्देव
गीता में कबीर साहेब स्वयं तत्वज्ञान खोलते हैं। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, अध्याय 15 में संसार वृक्ष काटकर परम पद (सत्यलोक) की प्राप्ति।
गीता अध्याय 4 श्लोक 34 “तद् विद् विद्यात् तुष्कुर् तत् विद्या विनयसम्पन्ने। ब्रह्मचारिवे समासेन राजन् विद्या समुदाहृतम्।।” भावार्थ: तत्वदर्शी संत से कविर्देव का ज्ञान प्राप्ति। यह संत रामपाल जी को संकेत।
गीता अध्याय 15 श्लोक 1 “ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।।” भावार्थ: तत्त्वज्ञान से वृक्ष काटकर कविर्देव के परम पद पर पहुंचें।
गीता अध्याय 15 श्लोक 16-18 “द्वौ इमौं पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च। क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते।।16।। उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः परमात्मेति तदुच्यते। यः लोकत्रयमाविश्य बिभर्ति अव्यय ईश्वरः।।17।। यस्मात्क्षरमतीतोऽहमक्षरादपि चोत्तमः। अतः अस्मि लोके वेदे च प्रथितः पुरुषोत्तमः।।18।।” भावार्थ: क्षर (ब्रह्म), अक्षर (परब्रह्म) से परे उत्तम पुरुष कबीर हैं, जो तीनों लोक धारण करते हैं।
4. पवित्र कुरान शरीफ से प्रमाण: अल्लाह कबीर
कुरान में कबीर को “अल्लाह कबीर” कहा। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, 6 दिनों की सृष्टि रचना उनकी लीला।
सूरत फुरकान 25, आयत 52-59 “फला तुटी अल्लाह कबीर… अल्लाह ने 6 दिनों में सृष्टि रची और 7वें दिन तख्त पर विराजा।” भावार्थ: काफिरों का न मानो, कबीर को अल्लाह मानो। तत्वदर्शी (बाखबर) से पूछो।
फजाईले अमाल (फजाईले जिक्र) आयत 1 “अल्लाह कबीर है।” भावार्थ: सीधे कबीर को परमात्मा घोषित। हदीस: “अल्लाहु अकबर (कबीर) है।”
5. पवित्र बाइबल से प्रमाण: साकार परमेश्वर
बाइबल में साकार परमेश्वर का दर्शन।
उत्पत्ति ग्रंथ अध्याय 1:26-27 “परमेश्वर ने 6 दिनों में सृष्टि रची।” भावार्थ: कबीर साहेब की सृष्टि लीला।
अय्यूब 36:5 “परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है… विवेकपूर्ण है।” भावार्थ: कबीर सर्वशक्तिमान। उत्पत्ति 18:1: अब्राहम के समक्ष प्रकट।
6. पवित्र गुरु ग्रंथ साहेब से प्रमाण: सृष्टि रचयिता
गुरु ग्रंथ में कबीर को ठग (लीला करने वाले) कहा।
राग सिरी, महला 1, पृष्ठ 24 “फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस… खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।” भावार्थ: कबीर सृष्टि रचयिता।
राग असावरी महला 1, पृष्ठ 721 “हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदीगार।” भावार्थ: कबीर ही सच्चा परवरदिगार।
7. कबीर सागर और कबीर वाणी से प्रमाण: स्वयं की अमृतवाणी
कबीर सागर सूक्ष्म वेद है।
कबीर सागर (ज्ञान बोध) “सतनाम निज मूल है, यह कबीर समझाय। दोई दीन खोजत फिरें, परम पुरुष नहिं पाय।।” भावार्थ: सतनाम से परम पुरुष (कबीर) प्राप्ति।
कबीर वाणी (साखी) “रूप देख भरमो नहीं, कहैं कबीर विचार। अलख पुरुष हृदये लखे, सोई उतरि है पार।।” भावार्थ: कबीर अलख पुरुष हैं।
कबीर वाणी (सतमार्ग दर्शन चैपाई) “जो जो वस्तू दृष्टि में आई, सोई सबहि काल धर खाई।। मूरति पूजैं मुक्त न होई, नाहक जन्म अकारथ खोई।।” भावार्थ: मूर्ति पूजा व्यर्थ, कबीर भक्ति से मुक्ति।
निष्कर्ष: सतभक्ति का आह्वान
सभी शास्त्र एक स्वर में घोषित करते हैं कि कबीर साहेब जी ही पूर्ण परमात्मा हैं – सृष्टि के जनक, मोक्षदाता। संत रामपाल जी महाराज जी के तत्वज्ञान से ये प्रमाण अकाट्य हैं। अब शास्त्रों की व्याख्या त्यागकर सतनाम-सारनाम की भक्ति अपनाएं। नाम दीक्षा लें, सतलोक जाएं। जय कबीर! जय संत रामपाल जी महाराज!
संदर्भ: अधिक के लिए jagatgururampalji.org पर सत्संग सुनें।
