नमस्कार, सत्य भक्तों! आज के इस भौतिकवादी युग में, जहां अज्ञानता का अंधकार चारों ओर फैला हुआ है, संत रामपाल जी महाराज जी का तत्वज्ञान हमें सच्चे मार्ग की ओर प्रकाशित करता है। संत रामपाल जी महाराज जी, जो स्वयं पूर्ण तत्वदर्शी संत हैं, पवित्र शास्त्रों की गहन व्याख्या के माध्यम से प्रमाणित करते हैं कि कबीर साहेब जी ही साकार पूर्ण परमात्मा हैं। वे ही कविर्देव के रूप में कलियुग में अवतरित हुए, सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक हैं। यह ब्लॉग संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान पर आधारित है, जहां वेद, गीता, कुरान, बाइबल, गुरु ग्रंथ साहेब और कबीर सागर जैसे शास्त्रों से प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं। प्रत्येक प्रमाण को उद्धरण (क्वोट) रूप में डिजाइन किया गया है, ताकि आप आसानी से समझ सकें। आइए, इन प्रमाणों से कबीर साहेब जी की दिव्यता को जानें और सच्ची भक्ति की ओर अग्रसर हों।
संत रामपाल जी महाराज जी का संदेश: “शास्त्रों में स्पष्ट प्रमाण है कि कबीर साहेब जी ही पूर्ण परमात्मा हैं। वे सतलोक से सशरीर अवतरित होते हैं, तत्वज्ञान का प्रचार करते हैं और भक्तों को अमर पद प्रदान करते हैं।”
1. पवित्र वेदों से प्रमाण: कबीर साहेब जी को कविर्देव कहा गया है
वेद, जो सृष्टि के आदि ज्ञान के स्रोत हैं, कबीर साहेब जी को पूर्ण परमात्मा के रूप में वर्णित करते हैं। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, ये श्लोक उनके अवतरण, साकार रूप, चमत्कारों और तत्वज्ञान प्रचार को सिद्ध करते हैं। कबीर साहेब जी बालक रूप में प्रकट होते हैं, कुंवारी गायों से पोषित होते हैं और कवि की उपाधि धारण कर वाणी से ज्ञान बांटते हैं।
यजुर्वेद अध्याय 29 मन्त्र 25 “समिद्धोऽअद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान्यजसि जातवेदः। आ च वह मित्रामहश्चिकित्वान्त्वं दूतः कविरसि प्रचेताः।।25।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): जब भक्त समाज शास्त्रविधि त्यागकर मनमाना आचरण करता है, तब कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्वज्ञान प्रकट करते हैं। यह कबीर साहेब जी के अवतरण और ज्ञान प्रचार को सिद्ध करता है।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मन्त्र 17 “शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन। कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्राम् अत्येति रेभन्।।17।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): पूर्ण परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होकर कविर्गीर्भि (कबीर वाणी) से निर्मल ज्ञान पुण्यात्माओं को कविताओं से बताते हैं। यह कबीर साहेब जी के बालक रूप और वाणी को प्रमाणित करता है।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मन्त्र 18 “ऋषिमना य ऋषिकृत् स्वर्षाः सहस्त्रणीथः पदवीः कवीनाम्। तृतीयम् धाम महिषः सिषा सन्त् सोमः विराजमानु राजति स्टुप्।।18।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): पूर्ण परमात्मा विलक्षण बच्चे के रूप में आकर प्रसिद्ध कवि की भूमिका करते हैं, हजारों वाणियां रचते हैं जो भक्तों के लिए स्वर्ग तुल्य हैं। वे सत्यलोक पर मानव सदृश तेजोमय शरीर में विराजमान हैं।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मन्त्र 9 “अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।9।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): अमर पुरुष (कबीर साहेब जी) बालक रूप में प्रकट होने पर कुंवारी गायें स्वयं दूध देती हैं। यह उनके लालन-पालन की लीला को सिद्ध करता है।
ये वेद प्रमाण संत रामपाल जी महाराज जी की व्याख्या से स्पष्ट हैं कि कबीर साहेब जी ही सृष्टि के आदि रचयिता हैं।
2. पवित्र गीता से प्रमाण: तत्वदर्शी संत के माध्यम से कविर्देव की पहचान
भगवद्गीता में भगवान कबीर साहेब जी स्वयं तत्वज्ञान का रहस्य खोलते हैं। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, गीता अध्याय 15 में संसार रूपी वृक्ष को काटकर परम पद (सत्यलोक) की प्राप्ति का वर्णन है, जो कबीर साहेब जी ही हैं।
गीता अध्याय 4 श्लोक 34 “तद् विद् विद्यात् तुष्कुर् तत् विद्या विनयसम्पन्ने। ब्रह्मचारिवे समासेन राजन् विद्या समुदाहृतम्।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): तत्वदर्शी संत से ही पूर्ण परमात्मा कविर्देव के विषय में ज्ञान प्राप्ति संभव है। यह संत रामपाल जी महाराज जी को ही संकेत करता है।
गीता अध्याय 15 श्लोक 1 “ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष को तत्त्वज्ञान से काटकर कविर्देव के परम पद पर पहुंचना चाहिए, जहां से लौटना नहीं पड़ता।
गीता के ये श्लोक कबीर साहेब जी को मोक्षदाता सिद्ध करते हैं।
3. पवित्र कुरान शरीफ से प्रमाण: कबीर साहेब जी ही अल्लाह हैं
कुरान में कबीर साहेब जी को “अल्लाह कबीर” कहा गया है। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, सृष्टि रचना के 6 दिनों का वर्णन कबीर साहेब जी की लीला है।
सूरत फुरकान 25, आयत 52-59 “फला तुटी अल्लाह कबीर… अल्लाह ने 6 दिनों में सृष्टि रची और 7वें दिन तख्त पर विराजा।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): काफिरों का कहा न मानो, कबीर को अल्लाह मानो। तत्वदर्शी संत (बाखबर) से पूछो। यह कबीर साहेब जी की सृष्टि रचना को प्रमाणित करता है।
फजाईले अमाल (फजाईले ज़िक्र) आयत 1 “अल्लाह कबीर है।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): सीधे कबीर साहेब जी को परमात्मा घोषित करता है।
4. पवित्र बाइबल और गुरु ग्रंथ साहेब से प्रमाण: साकार परमात्मा का दर्शन
बाइबल में कबीर साहेब जी को साकार परमेश्वर कहा गया है, जबकि गुरु ग्रंथ साहेब में उन्हें सृष्टि रचयिता।
उत्पत्ति ग्रन्थ अध्याय 1:26-27 “परमेश्वर ने 6 दिनों में सृष्टि रची।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): यह कबीर साहेब जी की सृष्टि लीला को सिद्ध करता है।
राग सिरी, महला 1, पृष्ठ 24 (गुरु ग्रंथ साहेब) “फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस… खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): कबीर साहेब जी ठग (लीला करने वाले) और सृष्टि रचयिता हैं।
5. कबीर सागर और कबीर वाणी से प्रमाण: स्वयं की अमृतवाणी
कबीर सागर में कबीर साहेब जी के चमत्कार जैसे नामकरण, सुन्नत बचाव, भंडारा वर्णित हैं।
कबीर सागर (बोध सागर, जीव धर्म बोध अध्याय) “पूर्ण तत्वदर्शी संत की पहचान… चमत्कार जैसे कमाल-कमाली का शव जीवित करना।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): ये कबीर साहेब जी की सर्वशक्तिमानता सिद्ध करते हैं।
कबीर वाणी (अमृतवाणी शब्द) “अविगत से चल आए, कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया। न मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक हो दिखलाया।” भावार्थ (संत रामपाल जी महाराज के अनुसार): कबीर साहेब जी स्वयंभू हैं, सत्यलोक से आते हैं।
निष्कर्ष: सच्ची भक्ति का मार्ग
सभी शास्त्र एक स्वर में चीख-चीखकर कहते हैं कि कबीर साहेब जी ही पूर्ण परमात्मा हैं। संत रामपाल जी महाराज जी के तत्वज्ञान से ये प्रमाण अकाट्य हो जाते हैं। अब समय है कि हम शास्त्रों की पूजा त्यागकर कबीर साहेब जी की सतभक्ति अपनाएं। नाम दीक्षा लें और सतलोक प्राप्त करें। जय कबीर! जय संत रामपाल जी महाराज!
संदर्भ: अधिक जानकारी के लिए jagatgururampalji.org पर जाएं। सत्संग सुनें और जीवन बदलें।
